Wednesday, 12 March 2014

रहल आम क कर्इ बगीचाअब ढ़ूढले एक्कों न पइबाकाशी में र हके काशी कअब तू लगड़ा कभी न खइबानब्बे रूपिया ढोली मघर्इपान बिकल अब कहा घुलइबागस आर्इ जब बादाम पिस्ताकेसर का भाव मोलइबाबाबा के नगरी में बूटीका छनबा और का छनवर्इबकहां से अब काया फरियार्इमहंगार्इ हो गइल अकासीरांड, सांड़, सीढ़ी, से नाहीइनसे बचा त सेवे काशी...

"पिता है तो बाज़ार के सब खिलौने अपने हैं"
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पिता जीवन है, सम्बल है, शक्ति है,

पिता सृष्टि में निर्माण की अभिव्यक्ति है,


पिता अँगुली पकडे बच्चे का सहारा है,

पिता कभी कुछ खट्टा कभी खारा है,



पिता पालन है, पोषण है, परिवार का अनुशासन है,

पिता धौंस से चलने वाला प्रेम का प्रशासन है,



पिता रोटी है, कपडा है, मकान है,

पिता छोटे से परिंदे का बडा आसमान है,



पिता अप्रदर्शित-अनंत प्यार है,

पिता है तो बच्चों को इंतज़ार है,



पिता से ही बच्चों के ढेर सारे सपने हैं,

पिता है तो बाज़ार के सब खिलौने अपने हैं,



पिता से परिवार में प्रतिपल राग है,

पिता से ही माँ की बिंदी और सुहाग है,



पिता परमात्मा की जगत के प्रति आसक्ति है,

पिता गृहस्थ आश्रम में उच्च स्थिति की भक्ति है,



पिता अपनी इच्छाओं का हनन और परिवार की पूर्ति है,

पिता रक्त निगले हुए संस्कारों की मूर्ति है,



पिता एक जीवन को जीवन का दान है,

पिता दुनिया दिखाने का अहसान है,



पिता सुरक्षा है, अगर सिर पर हाथ है,

पिता नहीं तो बचपन अनाथ है,



पिता नहीं तो बचपन अनाथ है,

तो पिता से बड़ा तुम अपना नाम करो,

पिता का अपमान नहीं उनपर अभिमान करो,



क्योंकि माँ-बाप की कमी को कोई बाँट नहीं सकता,

और ईश्वर भी इनके आशीषों को काट नहीं सकता,



विश्व में किसी भी देवता का स्थान दूजा है,

माँ-बाप की सेवा ही सबसे बडी पूजा है,



विश्व में किसी भी तीर्थ की यात्रा व्यर्थ हैं,

यदि बेटे के होते माँ-बाप असमर्थ हैं,



वो खुशनसीब हैं माँ-बाप जिनके साथ होते हैं,

क्योंकि
माँ-बाप
के
आशीषों
के
हाथ

हज़ारों हाथ होते हैं।